Vodafone Idea के CEO को तीन साल वेतन नहीं मिलेगा, जानें क्या है वजह

Vodafone Idea (VI) की 25वीं सालाना आम बैठक 30 सितंबर को होनी है। बैठक में कंपनी राजीव ठक्कर की नियुक्ति एवं अन्य प्रस्तावों पर शेयरधारकों (Share Holder) की मंजूरी मांग सकती है...

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Vodafone - Idea

Vodafone Idea Limited में लागत कटौती होने की संभावना दिखाई दे रही है। कंपनी के एक प्रस्ताव के अनुसार उसके प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजीव ठक्कर को उनके मौजूदा तीन बर्ष के कार्यकाल के लिए कोई पारिश्रमिक (वेतन) नहीं दिया जाएगा।

Vodafone Idea (VI) की 25वीं सालाना आम बैठक 30 सितंबर को होनी है। बैठक में कंपनी राजीव ठक्कर की नियुक्ति एवं अन्य प्रस्तावों पर शेयरधारकों (Share Holder) की मंजूरी मांग सकती है । तब संभावना है कि इस प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी जाए । कंपनी ने अपनी वार्षिक आम सभा की सूचना में बताया है कि वोडाफोन आइडिया ठक्कर द्वारा कंपनी के काम के चलते होने वाले खर्चे पर भी वहन कर सकती है।

Vodafone Idea Limited CEO

Vodafone Idea ने ठक्कर को बलेश शर्मा के इस्तीफे के बाद ठक्कर को 3 बर्ष के लिए अपना प्रबंध निदेशक एवं CEO नियुक्त किया था। उनका कार्यकाल 19 अगस्त 2019 से प्रभावी है और उन्हें उनके कार्यकाल के लिए ‘जीरो पारिश्रमिक (वेतन) दिया जाएगा। राजीव ठक्कर से पहले बलेश शर्मा को कंपनी ने सालाना 8.59 करोड़ रुपये का पैकेज दिया था। हालांकि उनके वेतन में 2019-20 के लिए किसी भी तरह की बढ़ोत्तरी नहीं की गई थी। ठक्कर के नियुक्ति की शर्तों में कहा गया है कि Vodafone Idea Limited कंपनी के काम से किए जाने वाले उनके रहने-खाने, मनोरंजन, यात्रा एवं अन्य खर्चे कंपनी की नीति के अनुरूप उठा सकती है।

ठक्कर को निदेशक मंडल अथवा समिति की बैठकों में शामिल होने के लिए किसी तरह का कोई शुल्क नहीं दिया जाएगा। इसी के साथ कंपनी अपनी ऋण सीमा को 25 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव भी बैठक में रख सकती है । निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी घाटे में है एवं भारी वित्तीय संकट से गुजर रही है।

सरकार द्वारा किए गए दावे के मुताबिक कंपनी को समायोजित सकल आय (एजीआर) बकाये के रूप में 58,250 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। अभी तक कंपनी इसमें से 7,854 करोड़ रुपये का ही भुगतान कर पाई है। इसी के साथ कंपनी के उपयोक्ताओं की संख्या भी लगातार घटती जा रही है। अगस्त 2018 में वोडाफोन एवं आइडिया के विलय के समय दोनों के मिलाकर 43 करोड़ के करीब उपभोक्ता थे। जो अब यह घटकर केवल 30.9 करोड़ ही रह गए हैं।